क्या है ज़िन्दगी?
एक पहेली जिसे तू सुलझा ना सका,
एक सहेली जिसे तू अपना ना सका,
एक कदम जिसे तू बढ़ा ना सका,
एक रसम जिसे तू निभा ना सका।

क्या है ज़िन्दगी?
एक कली जो खिल जाए,
एक चेहरा जो मुस्काए,
एक शब्द जो सुकून दे जाए,
एक पल जो जिया जाए।

क्या है ज़िन्दगी?
कितनों का यह सवाल है,
सैकड़ों हैं जवाब लेकिन
किसका सही, किसका गलत,
यह तो नज़रिए की बात है।

आरुषी सिंह